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ख़ुद से ख़ुद की बात

देखो लोगों का हुजूम चला आ रहा है
नज़रें चुरा लो इनसे, कहीं तुम्हें पहचान न लें |
तुम्हारी आँखों के नीचे का कालापन
इन्हें भी दिख ना जाए ||
कहेंगे कितना बेचारा हे,
अकेला खड़ा हे ख़ुद से हि बात करता हुआ
तुम्हारे अकेले होने को, तुम्हारी मजबूरी समझते हुए
पर क्या ऐसा हे, या होना चाहिए

चलो एक बार फिर कोशिश करते हैं

देखो लोगों का हुजूम चला आ रहा है
ढूँढो, शायद दिख जाए कोइ अपने जैसा
अकेला एक बस्ता पीठ पर लादे हुए
ख़ुद से बात करता हुआ
सोचता हो शायद उसे भी कोइ मिल जाए
कुछ बातें करके शायद उसका भी सफ़र कट जाए
कुछ अपनी उससे कहो, कुछ वो सुनाते हुए
यूँही सफ़र कटता हे
अकेले ख़ुद से ख़ुद की बातें करते हुए

#bebits #Arihant

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1 Comment

  • behtreen

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