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चांद, के पार चलो|
चांद, के पार चलो|

||चलो,चांद के पार चलो

कुछ सपने हैं दरमियां, उनहीं की खातिर चलो

बोझ में दबी सासों को पंख देने चलो,

जिम्मेदारियों को कोने में रख,आज नादानियां करने चलो,

दिल फरेबी ही करने चलो,

हालातों और जज़्बातों के मालूमात है हमें, पर आज बेखबर होकर चलो,

चांद को भी तुमाहरी खूबसूरती का दीदार कराने चलो,

आज खवाहिशों की सीड़ियों पर कदम रख, मेरे साथ चलो

बहुत जिंदगी बिताली तुमने और हमने, आज थोड़ी जीने चलो||

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1 Comment

  • waah, nice one...

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