तुम्हें पाने की कोशिश
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तुम्हें पाने के लिए हर रोज, खुद से लडकर फिर खडा़ हो जाता हूँ मैं

लेकिन वो जख्म आज भी मेरे सीने में दफ्न है, जो तुमसे मिले थें


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