मेरा डर
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कुछ ना था मेरे पास खोने को, तू मिला तो डर गया था मै,

प्यार के अल्फाजों से कोसो दूर था, तेरे आने से मतलब इनका समझ गया था मै,

अब जब तू नहीं तो क्या तेरे अहसास साथ है, आज भी किसी और के करीब आने से डरता हूं मै,

तेरे जाने के इतने अर्सो बाद आज भी तुझसे बोलने से पीछे हटता हूं, " तू मेरे लायक नहीं " ये तेरे मुह से सुनने से डरता हूं।

हां बहुत डरता हूं मै, बात बात पे हर बात सोचता हूं मै, शायद इसी डर ने हमें जुदा किया होगा पर ये बात मानने से भी डरता हूं मै।

penit.ink 4 0 penit-clap
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1 Comment

  • behtreen bhai..

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