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मोहब्बत!!

इन सितारों को मुट्ठी में भरूँ भी तो कैसे,

मैं ख़ुद से मोहब्बत करूँ भी तो कैसे||


ये रात जो पर्दा गिरा गई ग़ुनाहों से,

के जैसे हया भी सरक गई निगाहों से||

अब पाक़ साफ़ दामन करुँ भी तो कैसे,

मैं ख़ुद से मोहब्बत करूँ भी तो कैसे||


सुर्ख़ लबों की लाली अब फ़ीकी हुई है,

आँखों का कजरा भी धुल सा गया है||

है तार तार दामन सियूँ भी तो कैसे,

मैं ख़ुद से मोहब्बत करूँ भी तो कैसे||


घर में माँ शादी का जोड़ा सँभाले हैं,

बाबा ने दुआओं के सिक्के निकाले हैं||

उस चौखट पे दस्तक अब करूँ भी तो कैसे,

मैं खुद से मोहब्बत करूँ भी तो कैसे||


मेरे मान और ग़ुरूर को रौंद कर गए जो,

मेरे अरमान अपनी हवस में झोंक कर गए जो||

उन चेहरों को ओझल करूँ भी तो कैसे,

मैं खुद से मोहब्बत करूँ भी तो कैसे||


कुछ फ़र्ज़ अभी बाक़ी हैं जो अपनों से निभाने हैं,

कुछ कर्ज़ सियाहकारों के जो सूत समेत लौटाने हैं||

ये मुक़म्मल किए बिन मरुँ भी तो कैसे,

“नूर” अब तुझसे मोहब्बत करुँ भी तो कैसे||

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8 Comments

  • Bahut Bhaut Shukriya #kriti

  • bahut khoob !!!

  • Ji Zarur... :)

    Aap bhi padhte rhiyega... :)

  • shukriya, app bahut acha likhte hai.

    likhte rahiye ga..

  • Bahut Khoob Janab!! :)

  • suna hai zindagi imtihaan leti hai,

    mano na mano, humari taqleefe hi hume pahchaan deti hai,

    gar aasan hota to sab na nikal jaate isse,

    shukar hai meri is kalam ka jo mere is gumnaam dard ko kuch naam deti hai...


    #faiz

  • Bahut Hi Umda!!!

    Shukriya aapke is Hausle ke liye. :)


    Mere Halaton ne is Kadr toda hai mujhe,

    ki khud se hi Sharminda hu main!!

    Mere Jazbaaton ki kadr hai mujhe,

    Isliye hi to zinda hu main!!


    #Noor

  • mat kar khud ko yun tanha, waqt har zakham bhar deta hai,

    akeli nai tu is dard me, har banjaare ko upper wla ghar deta hai,

    kyun na kare tu khud se mohabbat bhla,

    wo bhi taqleefe banda dekh kr deta hai....


    #faiz

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