Namrata
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Poems by Heart



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है तुम्हारा धर्म गर देश जलाना।विनती है तुमसे,बस इक दिन की खातिर,वन्दे मातरम् मत गाना।।जिस धरती से तुम्हे प्यार नहीं,जिसकी तकलीफों से तुम्हारा सरोकार न...

कायरता का दंश झेल-झेल जब,मानवता अकुला जाती हो।धरा जब निर्जल शुष्क हो,निरीह बादल पे शर्माती हो।वीरता का हर स्वर्णिम पृष्ठ,जब छिन्न-भिन्न नज़र आता हो।जब...

नगाड़े बजाएंगे यमराज,तांडव करेंगे नटराज,महिष मुंड अपना झुकाएगा,काल भी फिर भय खायेगा,प्रेम भाव छोड़ नेत्रों में,इक बार अग्नि-लपट दिखाओ तो।हे,द्रौपदी!इक ब...

स्वतंत्रता इतनी भी स्वतंत्र नहीं।जकड़ती बेड़ियों में सदैव रहमतों की,बनती गुलाम सदैव अहमकों की,कब बन सकी ये स्वतंत्र पक्षी बतलाओ तो,इसकी पूर्णता का कोई द...