ye wo lamhe hai jinki badolat likhna shuru kiya tha.


नम आँखो के साथ जब खाने के लिए हाथ बढ़ाया,

एक भी नीवाला एसा ना था जब तेरा ख्याल ना आया,

दिल अभी भी इसी कशमकश मे है की क्या ज़्यादा तकलीफदे है,

तेरा दगा या तेरी सजा.

रो लेता फ़ैज़ तो शायद मन हल्का हो जाता,

लेकिन अफसोस आँसुओ ने भी इनकार कर दिया तेरे नाम पर बहने से.


#faiz